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फतेहपुर : बेसिक शिक्षा में अंधेरगर्दी का साम्राज्य, 6 साल पहले बन्द कार्यालय में लगातार बैठ रहा स्टाफ।

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फतेहपुर : बेसिक शिक्षा में अंधेरगर्दी का साम्राज्य, 6 साल पहले बन्द कार्यालय में लगातार बैठ रहा स्टाफ।

फतेहपुर :  बेसिक शिक्षा विभाग में अंधेरगर्दी का साम्राज्य है। शासन के निर्देश पर छह साल से बंद उप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अभी तक स्टाफ की नियुक्ति है। स्टाफ को हर महीने करीब 4.40 लाख वेतन का भुगतान किया जा रहा है। खास बात तो यह है सालभर पहले कार्यालय में तीन लिपिकों की नियुक्ति भी की गई। है तो यहां तक हुई कि डेढ़ साल पहले जानकारी होने पर तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने भी कार्यालय बंद कर लिपिकों की तैनाती ब्लाकों में करने के आदेश दिए थे, लेकिन उनके आदेश का क्रियान्वयन नहीं हो छह साल पहले तक जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के दो कार्यालय संचालित होते थे।

इनमें एक बीएसए और दूसरे में उप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का कमांड था। छह साल पहले शासन बीएसए के अलावा विभाग के अन्य सभी पद खत्म कर खंड शिक्षा अधिकारी का पद सृजित किया था। इसी के साथ उप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का अस्तित्व समाप्त हो गया था। पद खत्म होने के बावजूद अभी तक इस कार्यालय में 11 लिपिक, दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत । जिला पंचायत कार्यालय में संचालित इस कार्यालय के पूरे स्टाफ को महीने में करीब 4.40 लाख रुपये वेतन का भुगतान किया जा रहा है। इस मामले को डेढ़ साल पहले तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने संज्ञान लिया था। उन्होंने कार्यालय तत्काल बंद कर लिपिकों की तैनाती ब्लाकों में करने के निर्देश दिए थे। आदेश के कुछ ही दिन में उनका तबादला हो गया, तो यह आदेश रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया है। बीएसए शिवेेेन्द््द्र प्रताप सिंह का कहना है कि उप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सभी लिपिकों को ब्लाकों में बैठने के निर्देश हैं। ब्लाक न जाने वाले लिपिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सालभर पहले बंद हो चुके कार्यालय में तीन लिपिकों की और कर दी गई तैनाती।

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