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प्रयागराज : हिन्दी से अधिक अंग्रेजी स्कूलों के छात्र प्रेमचंद को पढ़ते हैं

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प्रयागराज : हिन्दी से अधिक अंग्रेजी स्कूलों के छात्र प्रेमचंद को पढ़ते हैं

हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराज | हिन्दी के सर्वाधिक चर्चित कथाकार हिन्दी पट्टी के छात्र-छात्राओं की किताबों से ही दूर हैं। कथा सम्राट प्रेमचंद की रचनाएं हिन्दी स्कूलों से अधिक अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाई जा रही हैं।सीबीएसई और यूपी बोर्ड के कक्षा 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम का विश्लेषण करने से साफ है कि यूपी बोर्ड ने जहां कक्षा 9 व 11 में प्रेमचंद की एक-एक कहानियों को शामिल किया है वहीं सीबीएसई के स्कूलों में पांच रचनाएं पढ़ाई जाती हैं। यूपी बोर्ड के स्कूलों में कक्षा 9 में चलने वाली किताब में प्रेमचंद की मंत्र और कक्षा 11 में बलिदान को पढ़ाया जा रहा है।10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के कोर्स में प्रेमचंद की एक भी रचना नहीं है। वहीं सीबीएसई की कक्षा 9 में चलने वाली क्षितिज भाग 1 में दो बैलों की कथा, कक्षा 10 की स्पर्श भाग 2 में बड़े भाई साहब, 11वीं की अंतरा भाग 1 में ईदगाह जबकि आरोह भाग 1 में नमक का दारोगा को रखा गया है। कक्षा 12 में चलने वाली अंतरा भाग 2 में रंगभूमि उपन्यास का अंश सूरदास की झोपड़ी पढ़ाया जा रहा है। 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गांव में एक कायस्थ परिवार में जन्में प्रेमचंद ने डेढ़ दर्जन उपन्यास और 300 से अधिक कहानियां लिखीं।

इनका कहना है

एक पाठक के तौर पर प्रेमचंद जैसे महान कथाकार की रचनाओं को पढ़ते समय हर बार एक नई उम्मीद का सुखद एहसास होता है। मेरा सौभाग्य है कि हिन्दी शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को इनकी कहानियों को पढ़ाते समय उनमें कहानी के तत्वों को समझने, मनुष्य और समाज के पारस्परिक सम्बन्ध के विश्लेषण तथा मानवीय मूल्यों के सृजन की अद्भुत सहायता मिलती है।
डॉ. चंद्रमौलि त्रिपाठी, प्रवक्ता केन्द्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट
प्रेमचंद की रचनाओं ने पीढ़ियों के मार्गदर्शन का काम किया है। उनकी लेखनी अद्भुत एवं राह दिखाने वाली है। मेरे ख्याल से यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में उनकी और रचनाओं को जगह मिलनी चाहिए।डॉ. योगेन्द्र सिंह, प्रधानाचार्य केपी इंटर कॉलेज

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